आज एक हर्फ़ को फिर ढूंढता फिरता है ख्याल
मदभरा हर्फ़ कोई, ज़हर भरा हर्फ़ कोई
दिलनशी हर्फ़ कोई, क़हर भरा हर्फ़ कोई
आज एक हर्फ़ को फिर ढूंढता फिरता है ख्याल
हर्फ़-ऐ-उल्फत कोई दिलदार नज़र हो जैसे
इतना रौशन की सरे मौज-ऐ-ज़र हो जैसे
सौहबतें यार में आगाज़-ऐ-तरब की सूरत
इतना = so much, रौशन = bright, सरे = in public, out there, मौज = surge, wave, ज़र = gold, मौज-ऐ-ज़र = surge (wave) of gold
सौहबतें = in company, यार = beloved, आगाज़ = start, beginning, तरब = joy, happiness
हर्फ़-ऐ-नफरत कोई शमशीरे गज़ब हो जैसे
नफरत = hate, शमशीरे = swords, गज़ब = very strong, powerful
-फैज़ अहमद फैज़
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