स्टीव जॅाब्स ने कही थी तीन कहानियां – दूसरी कहानी

31 12 2011

स्टीव जॅाब्स की दूसरी कहानी जो उन्होंने 2005 में स्तान्फोर्ड विश्वविद्यालय (Stanford University) के क्रमागति समारोह (Graduation Ceremony) में पंद्रह मिनट के भाषण में कहा था | उसी प्रेरणादायक भाषण को हिंदी में अनुवादित करते हुए, एक free thinker को श्रद्धांजलि |

पहली कहानी पिच्छले पोस्ट में प्रस्तुत है |

आज 2011 का आखिरी दिन है – इसके बाद हमारे जीवन में 2011 कभी नहीं आएगा, कभी भी नहीं | 2011 स्टीव जॅाब्स की दूसरी कहानी से ख़त्म होगी | नए साल, 2012, की शुरुआत स्टीव जॅाब्स की आखिरी कहानी से होगी |

5:38   मेरी दूसरी कहानी love और loss के बारे में है |

5:44   मैं lucky था, कम उम्र में ही मैंने खोज लिया कि मुझे क्या बेहद पसंद है |

5:48   बीस साल की उम्र में Woz और मैंने Apple की शुरुआत मेरे माता-पिता के गैरेज में की थी |

5:51   हमने बहुत मेहनत की थी, और दस साल में Apple हम दो गैरेज-निवासी से

5:55   बढकर २०० करोड़ डालर (या २ अरब डालर) की कम्पनी, चार हज़ार कर्मचारी से भी ज्यादा की कंपनी बनी |

5:59   हमने अपनी सर्वोतम रचना Macintosh को समय-सीमा से

6:03   एक साल पहले निकाला और मैं उस वक़्त 30 वर्ष का हुआ |

6:06   और फिर उसके बाद मुझे कंपनी में से निकाल दिया गया |

6:09   अपनी बनाई हुई कंपनी से कौन निकाल सकता है?

6:12   जैसे-जैसे Apple बढा, हमने एक व्यक्ति को hire किया जिसे मैं

6:15   बहुत बुद्धिमान समझता था जो मेरे साथ मिलकर कंपनी को चलाये |

6:18   लेकिन हमारे विचार अलग होने लगे और

6:20   आखिर में हमारे बीच मतभेद हो गया |

6:25   Board of Directors ने मेरा साथ नहीं दिया |

6:29   तो 30 वर्ष कि उम्र में मैं निकाला गया – और बहुत सार्वजानिक रूप से निकाला गया |

6:32   जो मेरी पूरी ज़िन्दगी का धेय था, वह चला गया |

6:35   मैं बिखर गया था |

6:38   कुछ महीनो तक मुझे पता नहीं था कि मैं क्या करूँ |

6:41   मुझे लगा कि मैं पिछली पीडी के उद्यमी (entreprenuer) लोगों के नज़रों में खर्रा नहीं उतरा

6:43   मैंने उस मशाल को गिरा दी जो मुझे दी गयी थी |

6:47   मैं David Packard और Bob Noyce से मिला

6:50   और उनसे माफ़ी मांगने की कोशिश की |

6:54   मैं सार्वजनिक पराजय (public failure) बन चुका था |

6:55   और मैं मण्डी से भाग जाने के बारे में भी सोच रहा था |

6:58   लेकिन धीरे-धीरे मुझे यह ज्ञान होने लगा कि मैं जो काम करता था मुझे बहुत पसंद था |

7:03   Apple में जो बिता, वह इस चीज़ को डगमगा नहीं सका |

7:07   नकारने के बावजूद, मेरी मोहब्बत कम नहीं हुई |

7:12   और मैंने तय किया कि मैं फिर से शुरू करूँगा |

7:14   मैंने उस समय नहीं देखा था, मगर Apple से निकाले जाना – यह मेरे लिए सबसे अच्छा हुआ |

7:21   नौसिखिये के हल्केपन ने – फिर से – सफल होने के भारीपन की जगह ली,

7:26   सब चीज़ों के बारे में अनिश्चित |

7:27   इसने मुझे आज़ादी दी और मैं अपने ज़िन्दगी के सबसे रचनात्मक (creative) दौरों में से एक से होकर गुजरा |

7:31   आनेवाले पांच सालों में मैंने NeXT नाम की कंपनी और

7:34   Pixar नाम की कंपनी की शुरुआत की |

7:35   औरे एक अद्भुत (amazing) औरत के प्यार में पागल हो गया जो अब मेरी बीवी है |

7:39   Pixar ने विश्व की पहला computer animated

7:42   फिल्म Toy Story बनाई

7:44   और आज दुनिया का सबसे सफल animation स्टूडियो है |

7:49   विस्मयपूर्ण घटनाक्रम में, Apple ने NeXT को खरीद लिया |

7:53   मैं Apple में वापस आया और हमने NeXT में जो technology की तैयारी की,

7:56   वो आज Apple के परिवर्तन में अहम है |

7:59   और Laurene और मैं, हमारा एक प्यारा-सा परिवार है |

8:03   मैं काफी निश्चित रूप से कह सकता हूँ कि

8:05   यह सब नहीं होता अगर मैं Apple से निकाला नहीं गया होता |

8:08   वो एक कडवी दवा थी, मगर शायद रोगी को इसकी ही ज़रुरत थी |

8:12   कभी-कभी ज़िन्दगी तुम्हारे सर पर ईंट फेक कर मारती है | हार मत मानना |

8:18   मुझे पक्के से विश्वास है कि सिर्फ एक ही चीज़ मुझे आशा देती रही कि मैं जो काम करता था उससे मुझे

         मोहब्बत थी |

8:21   तुम्हे क्या पसंद है उसे हर हालत में खोजना चाहिए |

8:24   और यह जितना सच तुम्हारे काम के बारे में है उतना ही सच तुम्हारे प्रेमी के बारे में है |

8:28   तुम्हारा काम तुम्हारी ज़िन्दगी का एक बड़ा हिस्सा भर देता है |

8:30   और वास्तव में तुष्ट (satisfied) रहने के लिए सिर्फ एक ही रास्ता है –

8:32   वही करो जो तुम मानते हो कि महान काम है |

8:35   और महान काम करने के लिए सिर्फ एक रास्ता है – जो काम तुम करते हो उससे तुम्हे बेहद मोहब्बत हो |

8:38   जिस काम से तुम्हे मोहब्बत हो, अगर तुम्हे अभी तक नहीं मिला, तो खोजता रहो | समझौता मत करो |

8:43   दिल के हर मामले की तरह, तुम्हे पता चल जायेगा जब तुम्हे वह मिल जाएगी |

8:47   और, जैसे हर अच्छे रिश्ते की तरह,

8:49   यह समय के साथ बेहतर और बेहतर होता जाता है |

8:52   तो खोजते रहो, समझौता मत करो |

9:05   मेरी तीसरी कहानी मौत (death) के बारे में है |

आगे की आखिरी कहानी अगले पोस्ट में है |
नए साल, 2012, की शुरुआत स्टीव जॅाब्स की आखिरी कहानी से होगी |

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स्टीव जॅाब्स ने कही थी तीन कहानियां

30 12 2011

स्टीव पॉल जॅाब्स (Steve Paul Jobs) (February 24, 1955 – October 5, 2011) का देहांत केवल छप्पन वर्ष की आयु में हुआ | दुनिया में कई लोग जनमते है और कई चले जाते हैं | और कई अपनी छाप छोड़ जाते है |

मगर कुछ ही होते हैं जिनकी छाप अपने परिवार, शहर, देश से बहार निकल कर पूरी दुनिया के, सिर्फ अमीर या सत्ताधारी या विशेषज्ञ या शैक्षिक क्षेत्र तक सिमित न रह कर, प्रत्येक व्यक्ति को छूती है और हर व्यक्ति उसके विचारों से निकली चीज़ों को अपने पास रखता है और रोज़ इस्तेमाल करता है |

हैं ऐसे कई लोग है, मगर वो बेनामी होकर चले जाते है| स्टीव जॅाब्स ही ऐसे व्यक्ति है जिन्होंने न केवल युवकों को प्रेरित किया, बल्कि आम आदमी को अपने जीवन में सरलता लाने की नयी दिशा दिखलाई |

2005 में स्टीव जॅाब्स ने स्तान्फोर्ड विश्वविद्यालय (Stanford University) के क्रमागति समारोह (Graduation Ceremony) में पंद्रह मिनट का भाषण दिया था | छोटा भाषण मगर प्रेरणादायक, उत्साहित और मनुष्य जीवन को कार्मिक दृष्टिकोण से देखने पर मजबूर कर देता है |

सरल और सच

उनके भाषण का पहला शब्द था – धन्यवाद |

मुझे दुःख होता है कि इस भाषण का अनुवाद कई भाषाओं में उपलब्ध है मगर हिंदी में नहीं | अनुवाद करना आसान नहीं है | वक़्त और मेहनत लगता है – विडियो को बार-बार, रोक-रोकके सुनना पड़ता है, भावना के अर्थ को जीवित रख, सही शब्दों का चुनाव करना होता है| Youtube के विडियो के नीचे Interactive Transcript को सलाम जिसने भाषण को पांच-छह सेकंड के वाक्यों में तोड़कर मेरे समय की बचत की | अनुवादित भाषण इसी रूप में प्रस्तुत किया गया है |

जो भी हो – इस ब्लॉग के पढने वालों को इसकी चिंता नहीं करनी है, आप धन्यवाद दे तो बढावा मिलेगा | तो आज मैं उसके जानदार शब्दों को हिंदी का लिबास पहनाता हूँ –

0:22   धन्यवाद| (लम्बी सास भरते हुए, मुस्कान के साथ) मैं आज आपके बीच, दुनिया की सर्वश्रेष्ठ

0:30   विश्वविद्यालयों में से एक, आपके कमेंसमेंट पर आकर सम्मानित हुआ |

0:35   सच सामने आये, मैं कभी कॉलेज से graduate नहीं हुआ |

0:41   और आज मैं जहाँ घड़ा हूँ – इससे करीब मैं कभी कॉलेज graduation तक नहीं पहुंचा |

0:47   आज मैं आपको मेरे जीवन की तीन कहानियाँ कहना चाहता हूँ | बस इतना ही |

0:52   कोई बड़ी बात नहीं | बस तीन कहानियाँ |

0:55   सबसे पहली कहानी बिंदुओं को जोड़ने के बारे में है |

1:01   छह महीने में मैंने Reed College छोड़ दी |

1:03   मगर मैं करीब अठारह महीने तक, पूरी तरह से छोड़ने से पहले, कॉलेज मैं ही रहा |

1:09   तो आखिर मैंने कॉलेज क्यों छोड़ा?

1:12   यह मेरे पैदा होने से पहले शुरू हुआ |

1:15   मेरी जैविक माँ (biological mother) एक युवा, अविवाहित graduate छात्रा थी |

1:19   और उन्होंने मुझे गोद लेने  (adoption) पर रखा |

1:22   उन्होंने निश्चय किया कि मुझे वही लोग गोद ले जिनके पास कॉलेज डिग्री हो |

1:26   तो मेरे लिए सब कुछ तय हो गया था कि मेरे पैदा होने पर

1:28   एक वकील और उसकी बीवी मुझे गोद ले लेंगे |

1:31   मगर मैं जब गर्भ से निकला तो आखिरी वक़त पर वकील और उसकी बीवी ने कहा कि

1:34   वे लड़की चाहते थे |

1:37   मेरे पालक माँ-बाप (adopted parents, foster parents), जो waiting list में थे,

1:40   उन्हें आधी रात को बुलावा आया कि, “हमारे पास एक अनपेक्षित (unexpected)

1:44   baby boy है, क्या आपको यह बच्चा चाहिए?”

1:47   उन्होंने कहा, “ज़रूर, क्यों नहीं !”

1:53   मेरी जैविक माँ (biological mother) को बाद में पता चला कि मेरी माँ कभी कॉलेज

से graduate नहीं हुई

1:55   और मेरे पिता कभी स्कूल से graduate नहीं हुए |

1:59   गोद लेने के आखिरी कागजों पर मेरी जैविक माँ (biological mother) ने sign करने

से मना कर दिया |

2:03   कुछ महीने बाद वे राज़ी हुई जब मेरे माता-पिता ने यह वादा किया कि

2:05   मैं कॉलेज ज़रूर जाऊँगा | यह मेरी ज़िन्दगी की शुरुआत थी |

2:12   और सत्रह साल बाद मैं कॉलेज गया | मगर मैंने भोलेपन में कॉलेज को चुना

2:19   जो Stanford College के जितना महंगा था |

2:22   और मेरे working-class माता-पिता के सारे बचत किये पैसे

2:24   मेरे tuition फीस में खर्च हो रहे थे |

2:27   छह महीने बाद, मुझे इसमें कोई अर्थ नहीं दिखा |

2:30   मुझे कुछ पता नहीं था कि मैं अपनी life से क्या करूँ |

2:32   और इसमें कॉलेज मेरी मदद कैसे कर सकता है – यह भी पता नहीं था |

2:36   और यहाँ मैं अपने माँ-बाप की पूरी ज़िन्दगी की कमाई को खर्च कर रहा था |

2:42   तो मैंने तय किया कि मैं कॉलेज छोड़ दूंगा और भरोसा था कि सब कुछ का हल खुद-ब-खुद निकल आएगा |

2:46   उस वक़्त यह सब बड़ा भयानक लगता था |

2:49   लेकिन पीछे मुड़कर देखने पर, यह मेरे सबसे अच्छे फैसलों में से एक है |

2:54   जैसे ही मैंने academic curriculum को छोड़ा, मैंने required classes लेना बंद कर

2:56   दिया जो मुझे पसंद नहीं थे |

2:59   और उन classes में जाना शुरु कर दिया जो अच्छी लगती थी |

3:04   यह सब कुछ खयाली (romantic) नहीं था | मेरे पास हॉस्टल रूम (dorm room) नहीं था,

3:08   तो मैं दोस्तों के कमरों के फर्श पर सोता था |

3:10   मैं पांच सेन्ट्स (5 cents) के लिए coke की बोतलों को वापस देता था ताकि खाना खरीद सकूँ

3:14   और हर रविवार रात सात मील (7 miles) पैदल चलकर, दूसरे शहर,

3:17   हरे कृष्णा मंदिर जाता था, हफ्ते के एक अच्छे खाने के लिए |

3:21   वहां का खाना मुझे बेहद पसंद था |

3:23   अपनी जिज्ञासा (curiosity) और अंतर्ज्ञान (intuition) को follow करते हुए,

3:26   मैं जिन-जिन चीज़ों से टकराया, वे सब मेरे लिए, बाद में, अनमोल साबित हुई |

3:29   उदहारण के तौर पर, उस ज़माने में, Reed College में शायद देश की सबसे अच्छी

3:34   सुलेख (calligraphy) शिक्षा मिलती थी |

3:38   सारे campus में, हर पोस्टर, हर गल्ले (drawer) के लेबेल बड़ी खूबसूरती

3:42   से हाथों से लिखे हुए थे |

3:45   क्योंकि मैंने curriculum छोड़ दी थी तो मैं किसी भी class में जा सकता था,

3:49   इसलिए मैंने सुलेख (calligraphy) पढने का फैसला किया |

3:53   मैंने serif और sans serif के बारे में सिखा,

3:56   शब्दों के बीच कितना फासला होना चाहिए,

3:59   एक बेहतरीन typography कैसे बेहतरीन बनती है – ये मैंने जाना |

4:03   वो खुबसूरत, ऐतिहासिक,

4:05   कलात्मक रूप से रहस्यपूर्ण (subtle) था, जो विज्ञान नहीं समझा सके

4:09   और यह सब मुझे आकर्षित करते थे |

4:12   दूर-दूर तक इन सबका कोई वास्तविक उपयोग नहीं था मेरी ज़िन्दगी में |

4:17   मगर दस साल बाद,

4:18   जब हम सबसे पहला Macintosh computer बना रहे थे,

4:21   वो सुलेख (calligraphy) की शिक्षा ताज़ा हो गयी | और हमने Mac में वो सब किया |

4:25   Mac पहला computer था जिसमे खुबसूरत typography थी |

4:29   अगर में इस course को नहीं लेता

4:32   तो Mac में कभी अनेक typefaces या बराबर दूरी के fonts नहीं होते |

4:37   और युंकी Windows ने Mac को हुबहू नक़ल की,

4:47   यह शायद सच होता कि किसी भी personal computers में सुलेख नहीं होता, अगर मैं वो class नहीं लेता |

4:57   जाहिर है कि, जब मैं कॉलेज में था,

5:00   आगे देखते हुए इन बिंदुओं को जोड़ना नामुमकिन था |

5:02   लेकिन दस साल बाद यह सब साफ़-साफ़ नज़र आता है |

5:07   फिर से, आप इन बिंदुओ को आगे देखते हुए नहीं जोड़ सकते;

5:10   आप पीछे मुड़कर ही जोड़ सकते है |

5:12   तो आपको विश्वास रखना होगा कि ये बिन्दुएँ – कैसे भी करके – भविष्य में जोड़ेंगी |

5:16   आपको विश्वास रखना होगा – अपने मन पर, नियति पर, ज़िन्दगी पर, कर्म पर, और जो भी |

5:22   भरोसा रखना कि बिन्दुएँ आगे चलकर जुड़ेंगी – यह आपको आत्मविश्वास

5:28   (confidence) देगा, भले चाहे आपको पत्थरों से भरे रास्ते पर चलना पड़े – और इससे ही फर्क पड़ता है |

5:38    मेरी दूसरी कहानी love और loss के बारे में है |

आगे का दो कहानियां अगले पोस्ट पर |





Life as it is

9 12 2011

Life as it is

Just keep going, keep flowing

Hitting pebbles here and there

Touching the bank up and below

 

Flying down, deep like a gorge

Hitting hard

Rising again with pride. Shamelessly.

 

Tearing away with all gusto

Bending its might, turning away

Coming again with all force – knowingly – failing

Beating again and again

 

Genteel, calm, swift, shimmering with sparkles

Open wide to lay bare

Giving away with quiet tears

Taking all that come, return only

Slowly touching the base, leaving as it comes

Liberated.

 

In fumes, evaporated in namelessness

Ethereally blending into one – into all – into none.

Rubbed off forever. Look again, look behind!