करियर

12 03 2009

सफ़र की क्या मंजिल हो

लहरों का क्या साहिल हो

माझी का क्या नाव हो

सपनो की क्या उड़ान हो

देखते थे यह सब ,सपनों में

सोचते थे यह सब, दिनों में

करते थे यह सब, खेलो में

सुनते थे यह सब, झुंडों में

किया क्या या यह क्या किया

सवाल था सीधा सा

किया वही जो सबने किया

क्या चाहा वोह न किया

पर किया वही जो सबने किया

देखो ,सुनो पर बोलो मत

घरों में लॉटरी आया

पैसे की जगह डिग्री लाया

अब आप भी बन सकते है म.बी.ऐ.

दीजे दो जवाब और १ लाख रुपये

किया वही जो सबने किया

वो माझी और लहरें फिर याद आये

कल के झुंड आज भी आये

सपनो की फूटी कटोरी में खून से लतपत अपनी कल्पना लाये