कुछ रिश्ते

2 07 2010

कुछ रिश्ते
न कहे जाये. न बोले जाये,
न सुने जाये, न देखे जाये

बस होते हैं
बेनाम –
गुमनाम या बदनाम

लिख जाते हैं, अमर प्रेम
पा जाते हैं खिताब

खतरनाक होते हैं ऐसे रिश्ते
लांघ जाते हैं दीवारें
टूट जाते है, बिखर जाते हैं
देते देते अंजाम

बस होते हैं
ऐसे कुछ रिश्ते

पाने की ख्वाहिश
उड़ने की चाहत
मिलने की प्यास
रहने की तड़प

गुलज़ार की जुबानी –
ज़िन्दगी तेरे ग़म ने रिश्ते नए सिखलाये

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