स्टीव जॅाब्स ने कही थी तीन कहानियां

30 12 2011

स्टीव पॉल जॅाब्स (Steve Paul Jobs) (February 24, 1955 – October 5, 2011) का देहांत केवल छप्पन वर्ष की आयु में हुआ | दुनिया में कई लोग जनमते है और कई चले जाते हैं | और कई अपनी छाप छोड़ जाते है |

मगर कुछ ही होते हैं जिनकी छाप अपने परिवार, शहर, देश से बहार निकल कर पूरी दुनिया के, सिर्फ अमीर या सत्ताधारी या विशेषज्ञ या शैक्षिक क्षेत्र तक सिमित न रह कर, प्रत्येक व्यक्ति को छूती है और हर व्यक्ति उसके विचारों से निकली चीज़ों को अपने पास रखता है और रोज़ इस्तेमाल करता है |

हैं ऐसे कई लोग है, मगर वो बेनामी होकर चले जाते है| स्टीव जॅाब्स ही ऐसे व्यक्ति है जिन्होंने न केवल युवकों को प्रेरित किया, बल्कि आम आदमी को अपने जीवन में सरलता लाने की नयी दिशा दिखलाई |

2005 में स्टीव जॅाब्स ने स्तान्फोर्ड विश्वविद्यालय (Stanford University) के क्रमागति समारोह (Graduation Ceremony) में पंद्रह मिनट का भाषण दिया था | छोटा भाषण मगर प्रेरणादायक, उत्साहित और मनुष्य जीवन को कार्मिक दृष्टिकोण से देखने पर मजबूर कर देता है |

सरल और सच

उनके भाषण का पहला शब्द था – धन्यवाद |

मुझे दुःख होता है कि इस भाषण का अनुवाद कई भाषाओं में उपलब्ध है मगर हिंदी में नहीं | अनुवाद करना आसान नहीं है | वक़्त और मेहनत लगता है – विडियो को बार-बार, रोक-रोकके सुनना पड़ता है, भावना के अर्थ को जीवित रख, सही शब्दों का चुनाव करना होता है| Youtube के विडियो के नीचे Interactive Transcript को सलाम जिसने भाषण को पांच-छह सेकंड के वाक्यों में तोड़कर मेरे समय की बचत की | अनुवादित भाषण इसी रूप में प्रस्तुत किया गया है |

जो भी हो – इस ब्लॉग के पढने वालों को इसकी चिंता नहीं करनी है, आप धन्यवाद दे तो बढावा मिलेगा | तो आज मैं उसके जानदार शब्दों को हिंदी का लिबास पहनाता हूँ –

0:22   धन्यवाद| (लम्बी सास भरते हुए, मुस्कान के साथ) मैं आज आपके बीच, दुनिया की सर्वश्रेष्ठ

0:30   विश्वविद्यालयों में से एक, आपके कमेंसमेंट पर आकर सम्मानित हुआ |

0:35   सच सामने आये, मैं कभी कॉलेज से graduate नहीं हुआ |

0:41   और आज मैं जहाँ घड़ा हूँ – इससे करीब मैं कभी कॉलेज graduation तक नहीं पहुंचा |

0:47   आज मैं आपको मेरे जीवन की तीन कहानियाँ कहना चाहता हूँ | बस इतना ही |

0:52   कोई बड़ी बात नहीं | बस तीन कहानियाँ |

0:55   सबसे पहली कहानी बिंदुओं को जोड़ने के बारे में है |

1:01   छह महीने में मैंने Reed College छोड़ दी |

1:03   मगर मैं करीब अठारह महीने तक, पूरी तरह से छोड़ने से पहले, कॉलेज मैं ही रहा |

1:09   तो आखिर मैंने कॉलेज क्यों छोड़ा?

1:12   यह मेरे पैदा होने से पहले शुरू हुआ |

1:15   मेरी जैविक माँ (biological mother) एक युवा, अविवाहित graduate छात्रा थी |

1:19   और उन्होंने मुझे गोद लेने  (adoption) पर रखा |

1:22   उन्होंने निश्चय किया कि मुझे वही लोग गोद ले जिनके पास कॉलेज डिग्री हो |

1:26   तो मेरे लिए सब कुछ तय हो गया था कि मेरे पैदा होने पर

1:28   एक वकील और उसकी बीवी मुझे गोद ले लेंगे |

1:31   मगर मैं जब गर्भ से निकला तो आखिरी वक़त पर वकील और उसकी बीवी ने कहा कि

1:34   वे लड़की चाहते थे |

1:37   मेरे पालक माँ-बाप (adopted parents, foster parents), जो waiting list में थे,

1:40   उन्हें आधी रात को बुलावा आया कि, “हमारे पास एक अनपेक्षित (unexpected)

1:44   baby boy है, क्या आपको यह बच्चा चाहिए?”

1:47   उन्होंने कहा, “ज़रूर, क्यों नहीं !”

1:53   मेरी जैविक माँ (biological mother) को बाद में पता चला कि मेरी माँ कभी कॉलेज

से graduate नहीं हुई

1:55   और मेरे पिता कभी स्कूल से graduate नहीं हुए |

1:59   गोद लेने के आखिरी कागजों पर मेरी जैविक माँ (biological mother) ने sign करने

से मना कर दिया |

2:03   कुछ महीने बाद वे राज़ी हुई जब मेरे माता-पिता ने यह वादा किया कि

2:05   मैं कॉलेज ज़रूर जाऊँगा | यह मेरी ज़िन्दगी की शुरुआत थी |

2:12   और सत्रह साल बाद मैं कॉलेज गया | मगर मैंने भोलेपन में कॉलेज को चुना

2:19   जो Stanford College के जितना महंगा था |

2:22   और मेरे working-class माता-पिता के सारे बचत किये पैसे

2:24   मेरे tuition फीस में खर्च हो रहे थे |

2:27   छह महीने बाद, मुझे इसमें कोई अर्थ नहीं दिखा |

2:30   मुझे कुछ पता नहीं था कि मैं अपनी life से क्या करूँ |

2:32   और इसमें कॉलेज मेरी मदद कैसे कर सकता है – यह भी पता नहीं था |

2:36   और यहाँ मैं अपने माँ-बाप की पूरी ज़िन्दगी की कमाई को खर्च कर रहा था |

2:42   तो मैंने तय किया कि मैं कॉलेज छोड़ दूंगा और भरोसा था कि सब कुछ का हल खुद-ब-खुद निकल आएगा |

2:46   उस वक़्त यह सब बड़ा भयानक लगता था |

2:49   लेकिन पीछे मुड़कर देखने पर, यह मेरे सबसे अच्छे फैसलों में से एक है |

2:54   जैसे ही मैंने academic curriculum को छोड़ा, मैंने required classes लेना बंद कर

2:56   दिया जो मुझे पसंद नहीं थे |

2:59   और उन classes में जाना शुरु कर दिया जो अच्छी लगती थी |

3:04   यह सब कुछ खयाली (romantic) नहीं था | मेरे पास हॉस्टल रूम (dorm room) नहीं था,

3:08   तो मैं दोस्तों के कमरों के फर्श पर सोता था |

3:10   मैं पांच सेन्ट्स (5 cents) के लिए coke की बोतलों को वापस देता था ताकि खाना खरीद सकूँ

3:14   और हर रविवार रात सात मील (7 miles) पैदल चलकर, दूसरे शहर,

3:17   हरे कृष्णा मंदिर जाता था, हफ्ते के एक अच्छे खाने के लिए |

3:21   वहां का खाना मुझे बेहद पसंद था |

3:23   अपनी जिज्ञासा (curiosity) और अंतर्ज्ञान (intuition) को follow करते हुए,

3:26   मैं जिन-जिन चीज़ों से टकराया, वे सब मेरे लिए, बाद में, अनमोल साबित हुई |

3:29   उदहारण के तौर पर, उस ज़माने में, Reed College में शायद देश की सबसे अच्छी

3:34   सुलेख (calligraphy) शिक्षा मिलती थी |

3:38   सारे campus में, हर पोस्टर, हर गल्ले (drawer) के लेबेल बड़ी खूबसूरती

3:42   से हाथों से लिखे हुए थे |

3:45   क्योंकि मैंने curriculum छोड़ दी थी तो मैं किसी भी class में जा सकता था,

3:49   इसलिए मैंने सुलेख (calligraphy) पढने का फैसला किया |

3:53   मैंने serif और sans serif के बारे में सिखा,

3:56   शब्दों के बीच कितना फासला होना चाहिए,

3:59   एक बेहतरीन typography कैसे बेहतरीन बनती है – ये मैंने जाना |

4:03   वो खुबसूरत, ऐतिहासिक,

4:05   कलात्मक रूप से रहस्यपूर्ण (subtle) था, जो विज्ञान नहीं समझा सके

4:09   और यह सब मुझे आकर्षित करते थे |

4:12   दूर-दूर तक इन सबका कोई वास्तविक उपयोग नहीं था मेरी ज़िन्दगी में |

4:17   मगर दस साल बाद,

4:18   जब हम सबसे पहला Macintosh computer बना रहे थे,

4:21   वो सुलेख (calligraphy) की शिक्षा ताज़ा हो गयी | और हमने Mac में वो सब किया |

4:25   Mac पहला computer था जिसमे खुबसूरत typography थी |

4:29   अगर में इस course को नहीं लेता

4:32   तो Mac में कभी अनेक typefaces या बराबर दूरी के fonts नहीं होते |

4:37   और युंकी Windows ने Mac को हुबहू नक़ल की,

4:47   यह शायद सच होता कि किसी भी personal computers में सुलेख नहीं होता, अगर मैं वो class नहीं लेता |

4:57   जाहिर है कि, जब मैं कॉलेज में था,

5:00   आगे देखते हुए इन बिंदुओं को जोड़ना नामुमकिन था |

5:02   लेकिन दस साल बाद यह सब साफ़-साफ़ नज़र आता है |

5:07   फिर से, आप इन बिंदुओ को आगे देखते हुए नहीं जोड़ सकते;

5:10   आप पीछे मुड़कर ही जोड़ सकते है |

5:12   तो आपको विश्वास रखना होगा कि ये बिन्दुएँ – कैसे भी करके – भविष्य में जोड़ेंगी |

5:16   आपको विश्वास रखना होगा – अपने मन पर, नियति पर, ज़िन्दगी पर, कर्म पर, और जो भी |

5:22   भरोसा रखना कि बिन्दुएँ आगे चलकर जुड़ेंगी – यह आपको आत्मविश्वास

5:28   (confidence) देगा, भले चाहे आपको पत्थरों से भरे रास्ते पर चलना पड़े – और इससे ही फर्क पड़ता है |

5:38    मेरी दूसरी कहानी love और loss के बारे में है |

आगे का दो कहानियां अगले पोस्ट पर |

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